अलाउद्दीन खिलजी का सिवाना और मारवाड़ अभियान – इंटरैक्टिव MCQ

अलाउद्दीन खिलजी का सिवाना और मारवाड़ अभियान

राजस्थान इतिहास — सम्पूर्ण नोट्स एवं 20 परीक्षा उपयोगी MCQs

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राजस्थान का इतिहास वीरता, त्याग और स्वाभिमान की अनेक गाथाओं से भरा हुआ है। इन्हीं में से एक है अलाउद्दीन खिलजी का सिवाना और मारवाड़ अभियान। यह अभियान केवल एक सैन्य विजय नहीं था, बल्कि राजपूतों के अदम्य साहस, बलिदान और मातृभूमि की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक भी है।

सिवाना दुर्ग का ऐतिहासिक महत्व

सिवाना दुर्ग राजस्थान के सबसे सुरक्षित और दुर्गम किलों में गिना जाता था। इसकी प्राकृतिक सुरक्षा, ऊँची पहाड़ियाँ तथा मजबूत किलेबंदी इसे लगभग अभेद्य बनाती थीं। इस कारण अलाउद्दीन खिलजी के लिए इस दुर्ग पर विजय प्राप्त करना आसान नहीं था।

सिवाना पर आक्रमण (2 जुलाई 1308 ई.)

दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्थान पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के उद्देश्य से 2 जुलाई 1308 ई. को सिवाना दुर्ग पर विशाल सेना भेजी।

इस अभियान का नेतृत्व मलिक कमालुद्दीन गुर्ग को सौंपा गया। उसने अपने चुने हुए सैनिकों के साथ दुर्ग को चारों ओर से घेर लिया।

खिलजी सेना को भारी नुकसान

सिवाना की घेराबंदी कई महीनों तक चली। राजपूत सैनिकों ने अत्यंत साहस और पराक्रम के साथ दुर्ग की रक्षा की।

इस युद्ध में खिलजी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसके प्रमुख सेनानायक नाहरखाँ तथा भोज युद्ध में मारे गए।

विश्वासघात से हुआ सिवाना का पतन

जब लंबे समय तक खिलजी सेना विजय प्राप्त नहीं कर सकी, तब एक राजद्रोही भावले ने अलाउद्दीन खिलजी की सहायता की।

उसने दुर्ग के एकमात्र जलस्रोत (कुण्ड) को गो-रक्त से अपवित्र करवा दिया।

जल तथा खाद्य सामग्री समाप्त होने के बाद राजपूतों के सामने दो ही विकल्प थे—आत्मसमर्पण या सम्मानपूर्वक मृत्यु। उन्होंने दूसरा मार्ग चुना।

जौहर और साका

राजपूत वीरांगनाओं ने अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए जौहर किया।

इसके बाद राजपूत वीरों ने केसरिया बाना धारण किया और अंतिम युद्ध (साका) के लिए रणभूमि में उतर गए।

सिवाना के शासक शीतलदेव ने अंत तक युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की।

शीतलदेव की वीरता

युद्ध समाप्त होने के बाद कमालुद्दीन गुर्ग ने शीतलदेव का शव और मस्तक अलाउद्दीन खिलजी के सामने प्रस्तुत किया।

इतिहासकारों के अनुसार शीतलदेव के विशाल शरीर और अद्भुत साहस को देखकर स्वयं अलाउद्दीन खिलजी भी आश्चर्यचकित रह गया।

अमीर खुसरो द्वारा प्रशंसा

प्रसिद्ध इतिहासकार एवं कवि अमीर खुसरो ने भी सिवाना युद्ध में राजपूतों की वीरता और बलिदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। यह इस युद्ध की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

सिवाना का नाम बदलकर खैराबाद

विजय के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाना दुर्ग का प्रशासन मलिक कमालुद्दीन गुर्ग को सौंप दिया।

इसके साथ ही सिवाना का नाम बदलकर खैराबाद रखा गया।

मारवाड़ अभियान

सिवाना विजय के बाद खिलजी सेना ने मारवाड़ की ओर बढ़ते हुए कई क्षेत्रों में भारी विनाश किया।

इस दौरान—

  • बाड़मेर को घेरा गया।
  • सांचोर के प्रसिद्ध महावीर मंदिर को ध्वस्त किया गया।
  • अनेक क्षेत्रों में लूटपाट और विनाश हुआ।

कान्हड़देव का प्रतिरोध

मारवाड़ में हो रहे विनाश को रोकने के लिए जालौर के शासक कान्हड़देव ने आसपास के राजपूत शासकों को सहायता के लिए बुलाया।

उन्होंने रेवन्ती तथा थाणासा मार्ग से राजपूत सेना को एकत्रित करने का प्रयास किया, जिससे खिलजी सेना का मुकाबला किया जा सके।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

विषयतथ्य
सिवाना पर आक्रमण2 जुलाई 1308 ई.
सिवाना का शासकशीतलदेव
खिलजी सेनापतिमलिक कमालुद्दीन गुर्ग
राजद्रोहीभावले
कुण्ड को अपवित्र किया गयागो-रक्त से
राजपूत महिलाओं ने कियाजौहर
सैनिकों ने कियासाका (केसरिया बाना पहनकर)
सिवाना का नया नामखैराबाद
राजपूतों की प्रशंसाअमीर खुसरो
मारवाड़ में घेरा गयाबाड़मेर
मंदिर जिसे तोड़ा गयासांचोर का महावीर मंदिर
सहायता के लिए बुलाने वाले शासककान्हड़देव

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाना पर कब आक्रमण किया?
उत्तर: 2 जुलाई 1308 ई. को।
2. सिवाना दुर्ग का शासक कौन था?
उत्तर: शीतलदेव।
3. सिवाना दुर्ग किस कारण गिरा?
उत्तर: राजद्रोही भावले द्वारा दुर्ग के जलस्रोत को गो-रक्त से अपवित्र कराने के कारण।
4. सिवाना विजय के बाद उसका नया नाम क्या रखा गया?
उत्तर: खैराबाद।
5. मारवाड़ अभियान में किस मंदिर को नष्ट किया गया?
उत्तर: सांचोर के महावीर मंदिर को।
निष्कर्ष: अलाउद्दीन खिलजी का सिवाना और मारवाड़ अभियान राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि राजपूतों के अदम्य साहस, जौहर, साका और स्वाभिमान का अमर उदाहरण भी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इस विषय की तिथियाँ, प्रमुख व्यक्तित्व और घटनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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अलाउद्दीन खिलजी का सिवाना और मारवाड़ अभियान • 1308 ई. • राजस्थान इतिहास