बीकानेर राज्य में किसान आंदोलन (कांगड़ काण्ड 1946) – सम्पूर्ण अध्ययन एवं MCQs

बीकानेर राज्य में किसान आंदोलन (कांगड़ काण्ड 1946)

कारण · घटनाएँ · प्रमुख तथ्य · जाँच समिति · MCQs

RAS, RPSC, REET, CET, पटवारी, 1st Grade
"राजस्थान के किसान आंदोलनों में बीकानेर राज्य का कांगड़ किसान आंदोलन (1946 ई.) विशेष महत्व रखता है। यह आंदोलन किसानों पर लगाए गए अत्यधिक लाग-बाग, बेगार प्रथा तथा जागीरदारों के अत्याचारों के विरुद्ध शुरू हुआ।"
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बीकानेर राज्य की राजनीतिक स्थिति

उस समय—

  • महाराजा: गंगासिंह
  • प्रधानमंत्री: के. एम. पणिक्कर

बीकानेर राज्य में किसानों पर अनेक प्रकार के कर लगाए जाते थे तथा उनसे बेगार भी कराई जाती थी।

कांगड़ गाँव के किसानों पर करों का बोझ

कांगड़ गाँव के किसानों पर एक ही वर्ष में करों का बोझ लगभग तीन गुना कर दिया गया।

ठाकुर गोपसिंह द्वारा लगाए गए प्रमुख कर (लाग-बाग) थे—

धुआँ लाग मुसाहिब लाग मलबा लाग हल लाग ढोल-गवाड़ लाग तोरण लाग ढोली लाग महतर लाग गौर उजवरना लाग

इसके अतिरिक्त प्रत्येक भेड़-बकरी पर कर तथा हरे गुंवार और उसकी फलियाँ भी किसानों से वसूली जाती थीं।

💡 महत्वपूर्ण तथ्य: कांगड़ गाँव के किसानों पर एक ही वर्ष में करों का बोझ तीन गुना कर दिया गया था।

बेगार प्रथा

करों के अतिरिक्त जागीरदार किसानों से अपने निजी कार्य भी बेगार (बिना वेतन के श्रम) के रूप में करवाते थे। इससे किसानों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई।

आंदोलन की शुरुआत

अक्टूबर 1946 ई. में अकाल के कारण फसलें खराब हो गईं। किसानों ने भू-राजस्व (लगान) देने की सहमति तो दी, लेकिन अतिरिक्त लाग-बाग देने में असमर्थता व्यक्त की।

यहीं से कांगड़ किसान आंदोलन की शुरुआत हुई।

ठाकुर गोपसिंह की दमनकारी कार्रवाई

27 अक्टूबर 1946 को ठाकुर गोपसिंह लगभग—

  • 20 पुलिसकर्मियों
  • 200 राजपूत एवं क्यामखानियों

के साथ कांगड़ गाँव पहुँचा।

उसने किसानों को धमकाते हुए कहा कि पहले लाग-बाग वसूली जाएगी, उसके बाद लगान लिया जाएगा।

प्रशासन का हस्तक्षेप

उसी दिन सुजानगढ़ के नाजिम तथा डी.एस.पी. भी गाँव पहुँचे।

उन्होंने भी किसानों पर कर देने का दबाव बनाया, लेकिन किसानों ने विरोध जारी रखा।

स्थिति गंभीर होने पर 35–40 किसान बीकानेर जाकर महाराजा से न्याय की गुहार लगाने निकल पड़े।

किसानों पर अत्याचार

29 अक्टूबर 1946 को जब ठाकुर गोपसिंह को किसानों के बीकानेर जाने की जानकारी मिली, तो उसने गाँव पर हमला कर दिया।

उसके बाद—

  • घरों की जबरन तलाशी ली गई।
  • महिलाओं और पुरुषों को पीटा गया।
  • उन्हें गढ़ में बंद किया गया।
  • मारपीट कर लगान, लाग-बाग और जुर्माना वसूला गया।
  • अनुपस्थित किसानों के परिवारों से भी जबरन धन वसूला गया।
  • कई किसानों से 25 रुपये तक जुर्माना लिया गया।

⚠️ अत्याचार की घटना: 29 अक्टूबर 1946 को ठाकुर गोपसिंह ने गाँव पर हमला कर किसानों को पीटा, घरों की तलाशी ली और जबरन जुर्माना वसूला।

महाराजा से न्याय की गुहार

बीकानेर पहुँचे किसानों ने महाराजा से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने बीकानेर प्रजा परिषद से सहायता मांगी।

जब उन्हें पता चला कि महाराजा प्रतिदिन शिवबाड़ी क्षेत्र में भ्रमण करने जाते हैं, तो वे वहाँ पहुँचे और उनके चरण पकड़कर न्याय की प्रार्थना की।

महाराजा ने पाँच प्रतिनिधियों को लालगढ़ बुलाया।

गृहमंत्री से मुलाकात

किसानों के प्रतिनिधि—

  • चुनाराम
  • शेराराम
  • मालाराम
  • बल्लूराम
  • दूसरे मालाराम

लालगढ़ पहुँचे, जहाँ उनकी मुलाकात गृहमंत्री ठाकुर प्रतापसिंह से हुई।

लेकिन गृहमंत्री ने किसानों की शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

प्रजा परिषद की भूमिका

बीकानेर प्रजा परिषद ने किसानों के समर्थन में सात सदस्यीय जाँच समिति गठित की।

इस समिति में शामिल थे—

  • स्वामी सच्चिदानन्द
  • पं. गंगादत्त रंगा
  • चौधरी हंसराज
  • मास्टर दीपचन्द
  • प्रो. केदारनाथ
  • चौधरी मौजीराम
  • चौधरी रूपराम

यह समिति 31 अक्टूबर 1946 को बीकानेर से रवाना हुई और 1 नवम्बर 1946 को कांगड़ पहुँची।

📌 जाँच समिति: 7 सदस्यीय समिति 31 अक्टूबर 1946 को बीकानेर से रवाना हुई और 1 नवम्बर 1946 को कांगड़ पहुँची।

📝 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

विषयतथ्य
आंदोलनकांगड़ किसान आंदोलन
राज्यबीकानेर
वर्ष1946
महाराजागंगासिंह
प्रधानमंत्रीके. एम. पणिक्कर
जागीरदारठाकुर गोपसिंह
मुख्य कारणलाग-बाग एवं बेगार
प्रमुख संगठनबीकानेर प्रजा परिषद
जाँच समिति7 सदस्यीय
समिति कांगड़ पहुँची1 नवम्बर 1946

❓ Frequently Asked Questions (FAQs)

1. कांगड़ किसान आंदोलन कहाँ हुआ था?
उत्तर: बीकानेर रियासत के कांगड़ गाँव में।
2. कांगड़ किसान आंदोलन कब हुआ?
उत्तर: 1946 ई. में।
3. आंदोलन का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: किसानों पर लगाए गए अत्यधिक लाग-बाग, बेगार प्रथा और जागीरदारों के अत्याचार।
4. कांगड़ आंदोलन का नेतृत्व किस संगठन ने किया?
उत्तर: बीकानेर प्रजा परिषद ने किसानों को समर्थन दिया और जाँच समिति गठित की।
5. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह राजस्थान इतिहास का प्रमुख किसान आंदोलन है और RPSC, REET, CET, Rajasthan Police तथा अन्य परीक्षाओं में नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।

🎯 निष्कर्ष

"बीकानेर राज्य का कांगड़ किसान आंदोलन (1946) राजस्थान के किसान संघर्षों का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस आंदोलन ने जागीरदारी व्यवस्था, अवैध करों और बेगार प्रथा के विरुद्ध किसानों की आवाज़ को बुलंद किया। बीकानेर प्रजा परिषद की सक्रिय भूमिका और जाँच समिति के गठन ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।"

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